शिक्षा और शिक्षा का स्तर
"शिक्षा" भारत में शिक्षा का स्तर क्यों गिर रहा है
1. शिक्षा और शिक्षा का स्तर:-
शिक्षा मनुष्य के जीवन का आधार है, जो न केवल उसे ज्ञान प्रदान करती है बल्कि उसके व्यक्तित्व, सोच और समाज में योगदान को भी आकार देती है। यहाँ कुछ प्रमुख कारण दिए गए हैं जो शिक्षा की आवश्यकता को दर्शाते हैं:
1. ज्ञान और समझ का विकास:-
शिक्षा हमें विभिन्न विषयों, विज्ञान, इतिहास, साहित्य और तकनीक का ज्ञान देती है। यह हमारी सोच को विस्तृत करती है और दुनिया को समझने में मदद करती है।
2. आत्मनिर्भरता और रोज़गार के अवसर:-
शिक्षा व्यक्ति को कौशल सिखाती है, जिससे वह आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन सकता है। उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण बेहतर नौकरियों के द्वार खोलते हैं।
3. तार्किक सोच और समस्या-समाधान क्षमता:-
शिक्षा हमें तर्कसंगत ढंग से सोचना और जीवन की चुनौतियों का समाधान करना सिखाती है। यह निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाती है।
4. सामाजिक विकास और नैतिक मूल्य:-
शिक्षा से ही व्यक्ति को समाज के नियम, संस्कृति और नैतिक मूल्यों का ज्ञान होता है। यह सहिष्णुता, अनुशासन और दूसरों के प्रति सम्मान की भावना पैदा करती है।
5. देश और समाज का विकास:-
शिक्षित नागरिक ही देश की प्रगति में योगदान देते हैं। शिक्षा से अंधविश्वास, भ्रष्टाचार और गरीबी कम होती है, जिससे राष्ट्र मजबूत बनता है।
6. आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण:-
शिक्षा व्यक्ति को आत्मविश्वासी बनाती है, उसकी प्रतिभा को निखारती है और उसे समाज में एक बेहतर इंसान बनने में मदद करती है।
7. तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति:-
आधुनिक युग में डिजिटल साक्षरता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बिना विकास संभव नहीं है। शिक्षा हमें नवीनतम तकनीकों से जोड़ती है।
2. भारत में शिक्षा का स्तर क्यों गिर रहा है?
शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं।
भारत में शिक्षा के स्तर में गिरावट के कई कारण हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख निम्नलिखित हैं:
1. गुणवत्ता की कमी:-
शिक्षकों का प्रशिक्षण और कौशल अपर्याप्त है।
पाठ्यक्रम अक्सर रटंत प्रणाली (Rote Learning) पर आधारित होता है, जिसमें रचनात्मकता और व्यावहारिक ज्ञान की कमी होती है।
सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएँ (जैसे कक्षाएँ, शौचालय, पुस्तकालय) की कमी है।
2. शिक्षकों की कमी और अनुपस्थिति:-
- कई स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं या शिक्षक अनुपस्थित रहते हैं।
- शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों (जैसे चुनाव ड्यूटी, सर्वेक्षण) का बोझ होता है।
3. डिजिटल डिवाइड (Digital Divide):-
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच तकनीकी पहुँच का अंतर है।
ऑनलाइन शिक्षा के दौरान गरीब परिवारों के बच्चों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा नहीं होती।
4. सरकारी नीतियों और फंडिंग की कमी:-
शिक्षा पर जीडीपी का खर्च (वर्तमान में ~3%) विकसित देशों (5-6%) की तुलना में कम है।
नीतियों का क्रियान्वयन (Implementation) कमजोर है, जैसे "राइट टू एजुकेशन (RTE)" का पूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा।
5. सामाजिक-आर्थिक असमानता:-
गरीब परिवारों के बच्चे मजदूरी या घरेलू कामों में लग जाते हैं, जिससे ड्रॉपआउट दर (Dropout Rate) बढ़ती है।
लड़कियों की शिक्षा पर अभी भी सामाजिक रूढ़िवादिता का प्रभाव है।
6. अंग्रेजी और प्राइवेट स्कूलों पर निर्भरता:-
- सरकारी स्कूलों से अभिभावकों का विश्वास उठ रहा है, जिससे प्राइवेट स्कूलों पर निर्भरता बढ़ी है।
- अंग्रेजी माध्यम की माँग बढ़ने से हिंदी/क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा का स्तर प्रभावित हुआ है।
7. रोजगार पर शिक्षा की कमी:-
शिक्षा प्रणाली में व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) और स्किल डेवलपमेंट पर कम ध्यान दिया जाता है।
डिग्री धारक युवाओं को रोजगार के लिए अतिरिक्त कोर्स करने पड़ते हैं।
8. संभावित समाधान:-
- शिक्षकों का बेहतर प्रशिक्षण और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना।
- व्यावहारिक और कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना।
- सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढाँचे और तकनीकी सुविधाएँ बढ़ाना।
- डिजिटल शिक्षा को सभी वर्गों तक पहुँचाना।
इन सुधारों के बिना, भारत में शिक्षा का स्तर सुधरना मुश्किल होगा।
9. निष्कर्ष
शिक्षा वह हथियार है जो इंसान को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाती है। यह न सिर्फ व्यक्तिगत जीवन को बेहतर बनाती है, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र को उन्नति के पथ पर अग्रसर करती है।
जय हिन्द जय भारत।
जय जवान जय किसान।
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